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गुरु पर संस्कृत श्लोक हिंदी में part2

गुरु पर संस्कृत श्लोक हिंदी में part2: पूर्णे तटाके तृषितः सदैव भूतेऽपि गेहे क्षुधितः स मूढः । कल्पद्रुमे सत्यपि वै दरिद्रः गुर्वादियोगेऽपि हि यः प्रमादी ॥ जो इन्सान गुरु मिलने के बावजुद प्रमादी रहे,...

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गुरु पर संस्कृत श्लोक हिंदी में Top Guru Shlok in hindi

गुरु पर संस्कृत श्लोक हिंदी में Top Guru Shlok in hindi प्रेरकः सूचकश्वैव वाचको दर्शकस्तथा । शिक्षको बोधकश्चैव षडेते गुरवः स्मृताः ॥ प्रेरणा देनेवाले, सूचन देनेवाले, (सच) बतानेवाले, (रास्ता) दिखानेवाले, शिक्षा देनेवाले, और बोध...

ऐसा गृहस्थाश्रम धन्य है गृहस्थी पर संस्कृत श्लोक हिंदी में Part 5 2

ऐसा गृहस्थाश्रम धन्य है गृहस्थी पर संस्कृत श्लोक हिंदी में Part 5

ऐसा गृहस्थाश्रम धन्य है गृहस्थी पर संस्कृत श्लोक हिंदी में Part 5: यस्य पुत्रो वशीभूतो भार्या छन्दानुगामिनी । विभवे यश्च सन्तुष्टः तस्य स्वर्ग इहेव हि ॥ जिसका पुत्र उसके वश है, पत्नी कहा करनेवाली...

गृहस्थी पर संस्कृत श्लोक हिंदी में Part 4 sanskritshlok 0

गृहस्थी पर संस्कृत श्लोक हिंदी में Part 4

गृहस्थी पर संस्कृत श्लोक हिंदी में Part 4 top sanskrit shlok त्यागाय समृतार्थानां सत्याय मिभाषिणाम् । यशसे विजिगीषूणां प्रजायै गृहमेधिनाम् ॥ सत्पात्र को दान देने के लिए धन इकट्ठा करनेवाले, यश के लिए विजय...

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गृहस्थी पर संस्कृत श्लोक हिंदी में Part 3

गृहस्थी पर संस्कृत श्लोक हिंदी में Part 3 Sanskrit shlok in hindi: त्रयः कालकृताः पाशाः शक्यन्ते न निवर्तितुम् । विवाहो जन्म मरणं यथा यत्र च येन च ॥ विवाह, जन्म, और मरण – ये...

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गृहस्थी पर संस्कृत श्लोक हिंदी में

गृहस्थी पर संस्कृत श्लोक हिंदी में: प्रीणाति य सुचरितैः पितरं स पुत्रो यद्भर्तुरेव हितमिच्छति तत्कलत्रम् । तन्मित्रमापदि सुखे च समक्रियं यत् एतत् त्रयं जगति पुण्यकृतो लभन्ते ॥ पिता को अपने सद्वर्तन से खुश करनेवाला...

दया पर संस्कृत श्लोक हिंदी में 4

दुष्ट पर संस्कृत श्लोक हिंदी में

दुष्ट पर संस्कृत श्लोक हिंदी में :- यथा परोपकारेषु नित्यं जागर्ति सज्जनः । तथा परापकारेषु जागर्ति सततं खलः ॥ जैसे सज्जन परोपकार करने में नित्य जाग्रत होता है, वैसे दुर्जन अपकार करने में हमेशा...

दुर्जन पर संस्कृत श्लोक हिंदी में Part4 2

दुर्जन पर संस्कृत श्लोक हिंदी में Part4

दुर्जन पर संस्कृत श्लोक हिंदी में Part4 : दुर्जनो नार्जवं याति सेव्यमानोऽपि नित्यशः । स्वेदनाभ्य़ंजनोपायैः श्र्वपुच्छमिव नामितम् ॥ जैसे कुत्ते की पूंछ स्वेदन, अंजन इत्यादि उपाय से सरल नहीं बनती, वैसे दुष्ट मानव हंमेशा...

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दुर्जन पर संस्कृत श्लोक हिंदी में Part3 Top Sanskrit Shlok

दुर्जन पर संस्कृत श्लोक हिंदी में Part3 Top Sanskrit Shlok मृगमीनसज्जनानां तृणजलसंतोषवृत्तीनाम् । लुब्धकधीवरपिशुनाः निष्कारणमेव वैरिणो जगति ॥ घास, पानी ओर संतोष से जीनेवाले हिरण, मछलियाँ सज्जन के अनुक्रम से पारधी, मच्छीमार ओर दुष्ट...