राष्ट्र के संस्कृत श्लोक हिन्दी में

राष्ट्र के संस्कृत श्लोक हिन्दी में

February 27, 2019  admin  0 Comments


यौवनं धनसंपत्ति प्रभुत्वमविवेकिता ।
एकैकमप्यनर्थाय किमु यत्र चतुष्टयम् ॥

युवानी, धन, सत्ता और अविवेक ये हर अपने आप में ही अनर्थकारी है, तो फिर जहाँ (एक के पास) चारों चार इकट्ठे हो, तब तो पूछना ही क्या ?



केचिदज्ञानतो नष्टाः केचिन्नष्टाः प्रमादतः ।
केचिज्ज्ञानावलेपेन केचिन्नष्टैस्तु नाशिताः ॥

कुछ लोग अज्ञान से बिगड गये हैं, कुछ प्रमाद से, तो कुछ ज्ञान के गर्व से बिगड गये हैं और कुछ लोगों को बिगडे हुए लोगों ने बिगाडा है ।

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त्यजेदेकं कुलस्यार्थे ग्रामस्यार्थे कुलं त्यजेत् ।
ग्रामं जनपदस्यार्थे आत्मार्थे पृथिवीं त्यजेत् ॥

कुल के हितार्थ एक का त्याग करना, गाँव के हितार्थ कुल का, देश के हितार्थ गाँव का और आत्म कल्याण के लिए पृथ्वी का त्याग करना चाहिए

see also : दुष्ट पर संस्कृत श्लोक हिंदी में

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5 Responses

  1. September 28, 2020

    […] Mahajogi.com Follow us on facebookअजरामरवत्प्राज्ञो विद्यामर्थं च चिन्तयेत् ।गृहीत इव केशेषु मृत्युना धर्ममाचरेत् ॥ […]

  2. October 1, 2020

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  3. October 1, 2020

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  5. October 16, 2020

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