Category: संस्कृत श्लोक

संस्कृत श्लोक Sanskrit shlok latest top best

संस्कृत श्लोक Sanskrit Shlokas With Hindi Meaning 0

संस्कृत श्लोक Sanskrit Shlokas With Hindi Meaning

संस्कृत श्लोक Sanskrit Shlokas With Hindi Meaning संस्कृत श्लोक Sanskrit Shlokas With Hindi Meaning सेवितव्यो महावृक्ष: फ़लच्छाया समन्वित:।यदि देवाद फलं नास्ति,छाया केन निवार्यते।।अर्थ — एक विशाल वृक्ष की सेवा करनी चाहिए। क्योंकि वह फल...

प्रेरणादायक संस्कृत श्लोक अर्थ सहित — Sanskrit Shlokas With Hindi Meaning 1

प्रेरणादायक संस्कृत श्लोक अर्थ सहित — Sanskrit Shlokas With Hindi Meaning

प्रेरणादायक संस्कृत श्लोक अर्थ सहित — Sanskrit Shlokas With Hindi Meaning संस्कृत भाषा विश्व की सबसे पुरानी भाषा है और संस्कृत भाषा का भारतीय संस्कृति में बहुत महत्व है। संस्कृत भाषा को देव भाषा...

दान पर संस्कृत श्लोक अर्थ सहित Sanskrit Shlokas With Hindi Meaning 0

दान पर संस्कृत श्लोक Part 2 Sanskrit Shlok in Hindi on daan

दान पर संस्कृत श्लोक Part 2 Sanskrit Shlok in Hindi on daan पिपीलिकार्जितं धान्यं मक्षिकासंचितं मधु । लुब्धेनोपार्जितं द्रव्यं समूलं च विनश्यति ॥ चींटी ने इकट्ठा किया हुआ धान्य, मधुमक्खी ने इकट्ठा किया हुआ...

दान पर संस्कृत श्लोक अर्थ सहित Sanskrit Shlokas With Hindi Meaning 0

दान पर संस्कृत श्लोक अर्थ सहित Sanskrit Shlokas With Hindi Meaning

Sanskrit Shlokas With Hindi Meaning दान पर संस्कृत श्लोक दाता, लेनेवाला, पावित्र्य, देय वस्तु, देश, और काल – ये छे दान के अंग हैं । दाता प्रतिगृहीता च शुद्धि र्देयं च धर्मयुक् । देशकालौ...

विद्या पर संस्कृत श्लोक हिन्दी में 3

विद्या पर संस्कृत श्लोक हिन्दी में

विद्या पर संस्कृत श्लोक हिन्दी में संयोजयति विद्यैव नीचगापि नरं सरित् । समुद्रमिव दुर्धर्षं नृपं भाग्यमतः परम् ॥ जैसे नीचे प्रवाह में बहेनेवाली नदी, नाव में बैठे हुए इन्सान को न पहुँच पानेवाले समंदर...

धर्म पर संस्कृत श्लोक हिन्दी में 2

धर्म पर संस्कृत श्लोक हिन्दी में

धर्म पर संस्कृत श्लोक हिन्दी में तर्कविहीनो वैद्यः लक्षण हीनश्च पण्डितो लोके ।भावविहीनो धर्मो नूनं हस्यन्ते त्रीण्यपि ॥ तर्कविहीन वैद्य, लक्षणविहीन पंडित, और भावरहित धर्म – ये अवश्य हि जगत में हाँसीपात्र बनते हैं...

तपस्या पर संस्कृत श्लोक हिन्दी में 1

तपस्या पर संस्कृत श्लोक हिन्दी में

तपस्या पर संस्कृत श्लोक हिन्दी में: मनःप्रसादः सौम्यत्वं मौनमात्मविनिग्रहः ।भावसंशुद्धिरित्येतत्तपो मानसमुच्यते ॥ मन की प्रसन्नता, सौम्यभाव, मौन, आत्मचिंतन, मनोनिग्रह, भावों की शुद्धि – यह मन का तप कहलाता है । अनुद्वेगकरं वाक्यं मुद्रण ई-मेलअनुद्वेगकरं...