दुर्जन पर संस्कृत श्लोक हिंदी में Top Sanskrit Shlok
बोधितोऽपि बहु सूक्तिविस्तरैः किं खलो जगति सज्जनो भवेत् । स्नापितोऽपि बहुशो नदीजलैः गर्दभः किमु हयो भवेत् कचित् ॥ अच्छे वचनों के उपदेश देने से क्या इस दुनिया में दुष्ट मानव सज्जन हो जायेंगे ? नदी के पानी से बार स्नान कराने के बावजुद क्या गधा कभी घोडा बन…
दुर्जन पर संस्कृत श्लोक हिंदी में Part2 Top Sanskrit Shlok
दुर्जन पर संस्कृत श्लोक हिंदी में Part2 Top Sanskrit Shlok वर्जनीयो मतिअमता दुर्जनः सख्यवैरयोः । श्र्वा भवत्यपकाराय लिहन्नपि दशन्नपि ॥ मतिमान मनवको दुष्टके साथ मैत्री या बेर नहीं करना चाहिए । कुत्ता चाटता है तो भी और काटता है तो भी नुकसान हि करता है ।…
दुर्जन पर संस्कृत श्लोक हिंदी में Part3 Top Sanskrit Shlok
दुर्जन पर संस्कृत श्लोक हिंदी में Part3 Top Sanskrit Shlok मृगमीनसज्जनानां तृणजलसंतोषवृत्तीनाम् । लुब्धकधीवरपिशुनाः निष्कारणमेव वैरिणो जगति ॥ घास, पानी ओर संतोष से जीनेवाले हिरण, मछलियाँ सज्जन के अनुक्रम से पारधी, मच्छीमार ओर दुष्ट निष्कारण बैरी होते हैं…
दुर्जन पर संस्कृत श्लोक हिंदी में Part4
दुर्जन पर संस्कृत श्लोक हिंदी में Part4 : दुर्जनो नार्जवं याति सेव्यमानोऽपि नित्यशः । स्वेदनाभ्य़ंजनोपायैः श्र्वपुच्छमिव नामितम् ॥ जैसे कुत्ते की पूंछ स्वेदन, अंजन इत्यादि उपाय से सरल नहीं बनती, वैसे दुष्ट मानव हंमेशा सेवा करने के बावजुद सरल नहीं बनता ।…
दुष्ट पर संस्कृत श्लोक हिंदी में
दुष्ट पर संस्कृत श्लोक हिंदी में :- यथा परोपकारेषु नित्यं जागर्ति सज्जनः । तथा परापकारेषु जागर्ति सततं खलः ॥ जैसे सज्जन परोपकार करने में नित्य जाग्रत होता है, वैसे दुर्जन अपकार करने में हमेशा जाग्रत होता है । तक्षकस्य विषं दन्ते मक्षिकायाश्र्च मस्तके ।…