🕉️ सत्यम् परं धीमहि – Meaning, Explanation & Spiritual Secret
📜 Original Shlok
जन्माद्यस्य यतोऽन्वयादितरतश्चार्थेष्वभिज्ञः स्वराट्।
तेने ब्रह्म हृदा या आदिकवये मुह्यन्ति यत्सूरयः।
तेजोवारिमृदां यथा विनिमयो यत्र त्रिसर्गोऽमृषा।
धाम्ना स्वेन सदा निरस्तकुहकं सत्यं परं धीमहि॥
— From Shrimad Bhagavatam (Canto 1, Chapter 1, Verse 1)
🔎 Satyam Param Dheemahi Meaning (Simple Hindi)
“सत्यं परं धीमहि” का अर्थ है —
👉 हम उस परम सत्य का ध्यान करते हैं।
यह परम सत्य कौन है?
वह है भगवान श्रीकृष्ण — जो सृष्टि के मूल कारण हैं।
📖 Word-by-Word Meaning
- सत्यं (Satyam) = परम सत्य / Ultimate Truth
- परम् (Param) = सर्वोच्च / Supreme
- धीमहि (Dheemahi) = हम ध्यान करते हैं / We meditate upon
👉 पूरा वाक्य:
हम उस सर्वोच्च परम सत्य का ध्यान करते हैं।
🌟 Spiritual Meaning
यह श्लोक Veda Vyasa द्वारा रचित Shrimad Bhagavatam का पहला श्लोक है।
इसमें बताया गया है कि:
- भगवान ही सृष्टि के मूल कारण हैं।
- वे सर्वज्ञ (सब कुछ जानने वाले) हैं।
- वे स्वयं प्रकाशमान हैं।
- माया (illusion) उन्हें छू नहीं सकती।
- वही अंतिम सत्य हैं।
🧘 Why This Shlok is Powerful?
- यह Gayatri Mantra की तरह ध्यान का श्लोक है।
- यह पूरे भागवत का सार है।
- यह हमें सिखाता है कि जीवन का लक्ष्य परम सत्य को जानना है।
- ध्यान और भक्ति का मूल मंत्र है।
🕉️ Life Lesson from Satyam Param Dheemahi
- संसार अस्थायी है।
- परम सत्य स्थायी है।
- बाहरी सफलता नहीं, आंतरिक सत्य महत्वपूर्ण है।
- ध्यान से ही सत्य की प्राप्ति होती है।
💡 Deep Insight (For Spiritual Seekers)
जब व्यक्ति “सत्यं परं धीमहि” का जप करता है, तो:
- मन स्थिर होता है
- भ्रम दूर होता है
- जीवन का उद्देश्य स्पष्ट होता है
- आत्मिक शक्ति बढ़ती है
यह केवल शब्द नहीं — यह ध्यान की अवस्था है।
🙏 Conclusion
“सत्यं परं धीमहि” हमें याद दिलाता है कि जीवन का अंतिम लक्ष्य परम सत्य का अनुभव करना है।
यह श्लोक केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि ध्यान करने के लिए है।
👉 रोज सुबह 11बार इसका जप करें और अंतर महसूस करें।
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