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स्तोत्र & मंत्र

श्री राम रक्षा स्त्रोत हिंदी में | Ram Raksha Stotra PDF & Lyrics

By SanskritShlok.com
18/09/2026 3 Min Read
Comments Off on श्री राम रक्षा स्त्रोत हिंदी में | Ram Raksha Stotra PDF & Lyrics

श्री राम रक्षा स्त्रोत (Ram Raksha Stotra in Hindi) हिन्दू धर्म के सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली स्त्रोतों में से एक माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि इस पावन स्त्रोत की रचना महर्षि बुधाक ने स्वप्न में भगवान शिव की प्रेरणा से की थी। जो व्यक्ति नियमित रूप से सच्चे मन से राम रक्षा स्त्रोत का पाठ करता है, उसके जीवन से सभी प्रकार के भय, बाधाएं और नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।

यदि आप भी अपने जीवन में मानसिक शांति, सुरक्षा और प्रभु श्रीराम की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए बहुत उपयोगी है। यहाँ आपको राम रक्षा स्त्रोत lyrics हिंदी और संस्कृत में, इसका सरल अर्थ और इसके पाठ से मिलने वाले चमत्कारी लाभों की पूरी जानकारी मिलेगी।

श्रीगणेशाय नमः ॥

अस्य श्रीरामरक्षास्तोत्र-मन्त्रस्य ।

बुधकौशिकऋषिः ।

श्रीसीतारामचन्द्रो देवता ।

अनुष्टुप् छन्दः ॥

सीता शक्तिः ।

श्रीमत् हनुमान् कीलकम् ।

श्रीरामचन्द्रप्रीत्यर्थे

जपे विनियोगः ॥

॥ अथ ध्यानम् ॥

ध्यायेदाजानुबाहुन्,

धृतशरधनुषम्,

बद्धपद्मासनस्थम् ।

पीतं वासो वसानन्,

नवकमलदल-

स्पर्धिनेत्रम् प्रसन्नम् ॥

वामाङ्कारूढसीता,

मुखकमलमिलल्,

लोचनन् नीरदाभम् ।

नानाऽलङ्कारदीप्तन्,

दधतमुरुजटा,

मण्डलं रामचन्द्रम् ॥

॥ इति ध्यानम् ॥

चरितं रघुनाथस्य

शतकोटिप्रविस्तरम् ।

एकैकमक्षरम् पुंसाम्

महापातकनाशनम् ॥१॥

ध्यात्वा नीलोत्पलश्यामम्

रामं राजीवलोचनम् ।

जानकीलक्ष्मणोपेतञ्

जटामुकुटमण्डितम् ॥२॥

सासितूणधनुर्बाण

पाणिन् नक्तञ्चरान्तकम् ।

स्वलीलया जगत्त्रातुम्

आविर्भूतमजं विभुम् ॥३॥

रामरक्षाम् पठेत्प्राज्ञः

पापघ्नीं सर्वकामदाम् ।

शिरो मे राघवः पातु

भालन् दशरथात्मजः ॥४॥

कौसल्येयो दृशौ पातु

विश्वामित्रप्रियः श्रुती ।

घ्राणम् पातु मखत्राता

मुखं सौमित्रिवत्सलः ॥५॥

जिह्वां विद्यानिधिः पातु

कण्ठम् भरतवन्दितः ।

स्कन्धौ दिव्यायुधः पातु

भुजौ भग्नेशकार्मुकः ॥६॥

करौ सीतापतिः पातु

हृदयञ् जामदग्न्यजित् ।

मध्यम् पातु खरध्वंसी

नाभिञ् जाम्बवदाश्रयः ॥७॥

सुग्रीवेशः कटी पातु

सक्थिनी हनुमत्प्रभुः ।

ऊरू रघूत्तमः पातु

रक्षःकुलविनाशकृत् ॥८॥

जानुनी सेतुकृत्पातु

जङ्घे दशमुखान्तकः ।

पादौ बिभीषणश्रीदः

पातु रामोऽखिलं वपुः ॥९॥

एतां रामबलोपेताम्

रक्षां यः सुकृती पठेत् ।

स चिरायुः सुखी पुत्री

विजयी विनयी भवेत् ॥१०॥

पातालभूतलव्योम

चारिणश्छद्मचारिणः ।

न द्रष्टुमपि शक्तास्ते

रक्षितं रामनामभिः ॥११॥

रामेति रामभद्रेति

रामचन्द्रेति वा स्मरन् ।

नरो न लिप्यते पापैर्

भुक्तिम् मुक्तिञ् च विन्दति ॥१२॥

जगज्जैत्रैकमन्त्रेण

रामनाम्नाऽभिरक्षितम् ।

यः कण्ठे धारयेत्तस्य

करस्थाः सर्वसिद्धयः ॥१३॥

वज्रपञ्जरनामेदम्

यो रामकवचं स्मरेत् ।

अव्याहताज्ञः सर्वत्र

लभते जयमङ्गलम् ॥१४॥

आदिष्टवान् यथा स्वप्ने

रामरक्षामिमां हरः ।

तथा लिखितवान् प्रातः

प्रबुद्धो बुधकौशिकः ॥१५॥

आरामः कल्पवृक्षाणाम्

विरामः सकलापदाम् ।

अभिरामस्त्रिलोकानाम्

रामः श्रीमान् स नः प्रभुः ॥१६॥

तरुणौ रूपसम्पन्नौ

सुकुमारौ महाबलौ ।

पुण्डरीकविशालाक्षौ

चीरकृष्णाजिनाम्बरौ ॥१७॥

फलमूलाशिनौ दान्तौ

तापसौ ब्रह्मचारिणौ ।

पुत्रौ दशरथस्यैतौ

भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ ॥१८॥

शरण्यौ सर्वसत्त्वानाम्

श्रेष्ठौ सर्वधनुष्मताम् ।

रक्षःकुलनिहन्तारौ

त्रायेतान् नौ रघूत्तमौ ॥१९॥

आत्तसज्जधनुषा-

विषुस्पृशावक्षया-

शुगनिषङ्गसङ्गिनौ ।

रक्षणाय मम रामलक्ष्मणा-

वग्रतः पथि सदैव गच्छताम् ॥२०॥

सन्नद्धः कवची खड्गी

चापबाणधरो युवा ।

गच्छन्मनोरथोऽस्माकम्

रामः पातु सलक्ष्मणः ॥२१॥

रामो दाशरथिः शूरो

लक्ष्मणानुचरो बली ।

काकुत्स्थः पुरुषः पूर्णः

कौसल्येयो रघूत्तमः ॥२२॥

वेदान्तवेद्यो यज्ञेशः

पुराणपुरुषोत्तमः ।

जानकीवल्लभः श्रीमान्

अप्रमेयपराक्रमः ॥२३॥

इत्येतानि जपन्नित्यम्

मद्भक्तः श्रद्धयाऽन्वितः ।

अश्वमेधाधिकम् पुण्यम्

सम्प्राप्नोति न संशयः ॥२४॥

रामन् दूर्वादलश्यामम्

पद्माक्षम् पीतवाससम् ।

स्तुवन्ति नामभिर्दिव्यैर्

न ते संसारिणो नरः ॥२५॥

रामं लक्ष्मणपूर्वजं रघुवरम्

सीतापतिं सुन्दरम् ।

काकुत्स्थङ् करुणार्णवङ् गुणनिधिम्

विप्रप्रियन् धार्मिकम् ।

राजेन्द्रं सत्यसन्धन्, दशरथतनयम्

श्यामलं शान्तमूर्तिम् ।

वन्दे लोकाभिरामम्, रघुकुलतिलकम्,

राघवं रावणारिम् ॥२६॥

रामाय रामभद्राय

रामचन्द्राय वेधसे ।

रघुनाथाय नाथाय

सीतायाः पतये नमः ॥२७॥

श्रीराम राम रघुनन्दन राम राम ।

श्रीराम राम भरताग्रज राम राम ।

श्रीराम राम रणकर्कश राम राम ।

श्रीराम राम शरणम् भव राम राम ॥२८॥

श्रीरामचन्द्रचरणौ मनसा स्मरामि ।

श्रीरामचन्द्रचरणौ वचसा गृणामि ।

श्रीरामचन्द्रचरणौ शिरसा नमामि ।

श्रीरामचन्द्रचरणौ शरणम् प्रपद्ये ॥२९॥

माता रामो, मत्पिता रामचन्द्रः ।

स्वामी रामो, मत्सखा रामचन्द्रः ।

सर्वस्वम् मे, रामचन्द्रो दयालुर्,

नान्यञ् जाने, नैव जाने न जाने ॥३०॥

दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य

वामे तु जनकात्मजा ।

पुरतो मारुतिर्यस्य

तं वन्दे रघुनन्दनम् ॥३१॥

लोकाभिरामं रणरङ्गधीरम्

राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम् ॥

कारुण्यरूपङ् करुणाकरन् तम्

श्रीरामचन्द्रं शरणम् प्रपद्ये ॥३२॥

मनोजवम् मारुततुल्यवेगञ्

जितेन्द्रियम् बुद्धिमतां वरिष्ठम् ॥

वातात्मजं वानरयूथमुख्यम्

श्रीरामदूतं शरणम् प्रपद्ये ॥३३॥

कूजन्तं रामरामेति

मधुरम् मधुराक्षरम् ।

आरुह्य कविताशाखाम्

वन्दे वाल्मीकिकोकिलम् ॥३४॥

आपदामपहर्तारन्

दातारं सर्वसम्पदाम् ।

लोकाभिरामं श्रीरामम्

भूयो भूयो नमाम्यहम् ॥३५॥

भर्जनम् भवबीजानाम्

अर्जनं सुखसम्पदाम् ।

तर्जनं यमदूतानाम्

रामरामेति गर्जनम् ॥३६॥

रामो राजमणिः सदा विजयते

रामं रमेशम् भजे ।

रामेणाभिहता निशाचरचमू

रामाय तस्मै नमः ।

रामान्नास्ति परायणम् परतरम्

रामस्य दासोऽस्म्यहम् ।

रामे चित्तलयः सदा भवतु मे

भो राम मामुद्धर ॥३७॥

राम रामेति रामेति

रमे रामे मनोरमे ।

सहस्रनाम तत्तुल्यम्

रामनाम वरानने ॥३८॥

इति श्रीबुधकौशिकविरचितम्,

श्रीरामरक्षास्तोत्रं सम्पूर्णम् ।

॥ श्रीसीतारामचन्द्रार्पणमस्तु ॥

श्री राम रक्षा स्त्रोत केवल एक पाठ नहीं है, बल्कि यह भगवान श्रीराम का वह कवच है जो हर परिस्थिति में भक्त की रक्षा करता है। यदि आप इसे अपने दैनिक पूजा पाठ का हिस्सा बनाते हैं, तो आपके जीवन में सकारात्मकता और मानसिक बल का संचार होता है।

उम्मीद है कि आपको यह जानकारी पसंद आई होगी। अगर आपका राम रक्षा स्त्रोत से जुड़ा कोई भी सवाल है, तो आप हमें नीचे कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं। इस पवित्र स्त्रोत को अपने परिवार और दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर शेयर करना न भूलें। जय श्री राम!

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