दान पर संस्कृत श्लोक अर्थ सहित Sanskrit Shlokas With Hindi Meaning

sanskrit shlok on daan
Sanskrit shlok on dan are here

Sanskrit Shlokas With Hindi Meaning दान पर संस्कृत श्लोक

दाता प्रतिगृहीता च शुद्धि र्देयं च धर्मयुक् ।
देशकालौ च दानानाम ङ्गन्येतानि षड् विदुः ॥

दाता, लेनेवाला, पावित्र्य, देय वस्तु, देश, और काल – ये छे दान के अंग हैं ।

दाता प्रतिगृहीता च शुद्धि र्देयं च धर्मयुक् ।

देशकालौ च दानानाम ङ्गन्येतानि षड् विदुः ॥

दाता, लेनेवाला, पावित्र्य, देय वस्तु, देश, और काल – ये छे दान के अंग हैं ।

आनन्दाश्रूणि रोमाञ्चो बहुमानः प्रियं वचः ।

तथानुमोदता पात्रे दानभूषणपञ्चकम् ॥

आनंदाश्रु, रोमांच, लेनेवाले के प्रति अति आदर, प्रिय वचन, सुपात्र को दान देने का अनुमोदन – ये पाँच दान के भूषण हैं ।

अनादरो विलम्बश्च वै मुख्यं निष्ठुरं वचः ।

पश्चात्तापश्च पञ्चापि दानस्य दूषणानि च ॥

तिरष्कार, देने में विलंब, मुँह फेरना, निष्ठुर वचन, और देने के बाद पश्चाताप – ये पाँच दान के दूषण हैं ।

Sanskrit Shlokas With Hindi Meaning

यद् दत्त्वा तप्यते पश्चादपात्रेभ्यस्तथा च यत् ।

अश्रद्धया च यद्दानं दाननाशास्त्रयः स्वमी ॥

देने के बाद पश्चात्ताप होना, अपात्र को देना, और श्रद्धारहित देना – इनसे दान नष्ट हो जाता है ।

लब्धानामपि वित्तानां बोद्धव्यौ द्वावतिक्रमौ ।

अपात्रे प्रतिपत्तिश्च पात्रे चाप्रतिपादनम् ॥

वित्तवानों के हाथ से धन का दो तरीकों से दुरुपयोग होता है; कुपात्र को दान देकर, और सत्पात्र को न देकर ।

द्वाविमौ पुरुषौ लोके न भूतौ न भविष्यतः ।

प्रार्थितं यश्च कुरुते यश्च नार्थयते परम् ॥

दो प्रकार के लोग होना मुश्किल है; जो दूसरों की प्रार्थना पूरी करता है, और जो दूसरे के पास मागता नहि ।

अनुकूले विधौ देयं एतः पूरयिता हरिः ।

प्रतिकूले बिधौ देयं यतः सर्वं हरिष्यति ॥

तकदीर अनुकुल हो तब दान देना चाहिए क्यों कि सब देनेवाला भगवान है । तकदीर प्रतिकुल हो तब भी देना चाहिए क्यों कि सब हरण करनेवाला भी भगवान ही है ।

बोधयन्ति न याचन्ते भिक्षाद्वारा गृहे ।

दीयतां नित्यमदातुः फलमीदृशम् ॥

घर जानेवाले याचक, भिक्षा नहीं मांग रहे बल्कि यह उपदेश दे रहे हैं कि नित्य दान देते रहो, (अन्यथा) अदातृत्व का परिणाम हम को देख लो !

दानेन भूतानि वशी भवन्ति

दानेन वैराण्यपि यान्ति नाशम् ।परोऽपि बन्धुत्वभुपैति दानैर्

दानं हि सर्वेव्यसनानि हन्ति ॥

दान से सभी प्राणी वश होते है; दान से बैर खत्म हो जाता है । दान से शत्रु भी भाई बन जाता है; दान से ही सभी संकट दूर होते हैं ।

देशकालौ च दानानाम ङ्गन्येतानि षड् विदुः ॥

दाता, लेनेवाला, पावित्र्य, देय वस्तु, देश, और काल – ये छे दान के अंग हैं ।

दाता प्रतिगृहीता च शुद्धि र्देयं च धर्मयुक् ।

देशकालौ च दानानाम ङ्गन्येतानि षड् विदुः ॥

दाता, लेनेवाला, पावित्र्य, देय वस्तु, देश, और काल – ये छे दान के अंग हैं ।

आनन्दाश्रूणि रोमाञ्चो बहुमानः प्रियं वचः ।

तथानुमोदता पात्रे दानभूषणपञ्चकम् ॥

Sanskrit Shlokas With Hindi Meaning

आनंदाश्रु, रोमांच, लेनेवाले के प्रति अति आदर, प्रिय वचन, सुपात्र को दान देने का अनुमोदन – ये पाँच दान के भूषण हैं ।

अनादरो विलम्बश्च वै मुख्यं निष्ठुरं वचः ।

पश्चात्तापश्च पञ्चापि दानस्य दूषणानि च ॥

तिरष्कार, देने में विलंब, मुँह फेरना, निष्ठुर वचन, और देने के बाद पश्चाताप – ये पाँच दान के दूषण हैं ।

यद् दत्त्वा तप्यते पश्चादपात्रेभ्यस्तथा च यत् ।

अश्रद्धया च यद्दानं दाननाशास्त्रयः स्वमी ॥

देने के बाद पश्चात्ताप होना, अपात्र को देना, और श्रद्धारहित देना – इनसे दान नष्ट हो जाता है ।

लब्धानामपि वित्तानां बोद्धव्यौ द्वावतिक्रमौ ।

अपात्रे प्रतिपत्तिश्च पात्रे चाप्रतिपादनम् ॥

वित्तवानों के हाथ से धन का दो तरीकों से दुरुपयोग होता है; कुपात्र को दान देकर, और सत्पात्र को न देकर ।

द्वाविमौ पुरुषौ लोके न भूतौ न भविष्यतः ।

प्रार्थितं यश्च कुरुते यश्च नार्थयते परम् ॥

दो प्रकार के लोग होना मुश्किल है; जो दूसरों की प्रार्थना पूरी करता है, और जो दूसरे के पास मागता नहि ।

अनुकूले विधौ देयं एतः पूरयिता हरिः ।

प्रतिकूले बिधौ देयं यतः सर्वं हरिष्यति ॥

तकदीर अनुकुल हो तब दान देना चाहिए क्यों कि सब देनेवाला भगवान है । तकदीर प्रतिकुल हो तब भी देना चाहिए क्यों कि सब हरण करनेवाला भी भगवान ही है ।

बोधयन्ति न याचन्ते भिक्षाद्वारा गृहे ।

दीयतां नित्यमदातुः फलमीदृशम् ॥

घर जानेवाले याचक, भिक्षा नहीं मांग रहे बल्कि यह उपदेश दे रहे हैं कि नित्य दान देते रहो, (अन्यथा) अदातृत्व का परिणाम हम को देख लो !

दानेन भूतानि वशी भवन्ति

दानेन वैराण्यपि यान्ति नाशम् ।परोऽपि बन्धुत्वभुपैति दानैर्

दानं हि सर्वेव्यसनानि हन्ति ॥

दान से सभी प्राणी वश होते है; दान से बैर खत्म हो जाता है । दान से शत्रु भी भाई बन जाता है; दान से ही सभी संकट दूर होते हैं ।

गृहस्थी पर संस्कृत श्लोक हिंदी में 

How to Meditate: A Comprehensive Guide for Beginners and Beyond

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