दान पर संस्कृत श्लोक in Hindi Part3
दान पर संस्कृत श्लोक in Hindi Part3 मैं ने अनेक प्रकार के दान और विविध रत्न दिये, पर एक भी मधुर वाक्य नहि दिया, इस लिए मेरा मुख सूअर का है Read more below………. चारित्रं चिनुते तनोति विनयं ज्ञानं नयत्युन्नतिं पुष्णाति प्रशमं तपः…
दान पर संस्कृत श्लोक Part4
Sanskrit Shlok in Hindi on daan रक्षन्ति कृपणाः पाणौ द्रव्यं प्राणमिवात्मनः । तदेव सन्तः सततमुत्सृजन्ति यथा मलम् ॥ कृपण (लोभी) प्राण की तरह द्रव्य का अपने हाथ में रक्षण करता है, पर संत पुरुष उसी द्रव्य को मल की तरह त्याग देते है । दाता नीचोऽपि सेव्यः…