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दान पर संस्कृत श्लोक in Hindi Part3
दान श्लोक

दान पर संस्कृत श्लोक in Hindi Part3

By SanskritShlok.com
18/09/2026 2 Min Read
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दान पर संस्कृत श्लोक in Hindi Part3

मैं ने अनेक प्रकार के दान और विविध रत्न दिये, पर एक भी मधुर वाक्य नहि दिया, इस लिए मेरा मुख सूअर का है Read more below……….

  • चारित्रं चिनुते तनोति विनयं ज्ञानं नयत्युन्नतिं
  • पुष्णाति प्रशमं तपः प्रबलयत्युल्लासयत्यागमम् ।
  • पुण्यं कन्दलयत्यघं दलयति स्वर्गं ददाति क्रमात्
  • निर्वाणश्रियमातनोति निहितं पात्रे पवित्रं धनम् ॥
  • (सु) पात्र में रखा हुआ (दिया हुआ) धन चारित्र बनाता है, विनय फैलाता है, ज्ञान की उन्नति करता है, प्रशम को पुष्ट करता है, तप को प्रबल बनाता है, वेद के ज्ञान को उल्लासित करता है, पुण्य का फल देता है, पाप का नाश करता है, स्वर्ग दिलाता है, और क्रमशः निवार्ण की शोभा दिलाता है ।
  • कुपात्र दानात् च भवेत् दरिद्रो
  • दारिद्र्य दोषेण करोति पापम् ।
  • पापप्रभावात् नरकं प्रयाति
  • पुनर्दरिद्रः पुनरेव पापी ॥
  • कुपात्र को दान देने से दरिद्री बनता है । दारिद्र्य दोष से पाप होता है । पाप के प्रभाव से नरक में जाता है; फिर से दरिद्री और फिर से पाप होता है ।
  • सुपात्रदानात् च भवेत् धनाढ्यो
  • धनप्रभावेण करोति पुण्यम् ।
  • पुण्यप्रभावात् सुरलोकवासी
  • पुनर्धनाढ्यः पुनरेव भोगी ॥
  • सुपात्र को दान देने से, इन्सान धनवान बनता है; (फिर) धन के प्रभाव से पुण्यकर्म करता है; पुण्य के प्रभाव से उसे स्वर्ग प्राप्त होता है; और फिर से धनवान और फिर से भोगी बनता है ।
  • फलं यच्छति दातृभ्यो दानं नात्रास्ति संशयः ।
  • फलं तुल्यं ददात्येतदाश्चर्यं त्वनुमोदकम् ॥
  • दान करने से दान फल देता है उसमें संशय नहि, पर पीछे से वह उतना ही आनंद रुपी फल देता है, वह आश्चर्य है ।
Top sanskrit shlok on daan
  • सुदानात्प्राप्यते भोगः सुदानात्प्राप्यते यशः ।
  • सुदानात् जायते कीर्तिः सुदानात् प्राप्यते सुखम् ॥
  • सत् (सम्यक्) दान करने से यश, कीर्ति और सुख प्राप्त होते हैं ।
  • मायाहंङ्कार लज्जाभिः प्रत्युपक्रिययाऽथवा ।
  • यत्किञ्चिद्दीयते दानं न तध्दर्मस्य साधकम् ॥
  • माया से, अहंकार से, लज्जा से या बदला लेने की भावना से जो कुछ भी दान दिया जाता है, उस दान से धर्म नहि साधा जाता ।
  • यदि चास्तमिते सूर्ये न दत्तं धनमर्थिनाम् ।
  • तध्दनं नैव जानामि प्रातः कस्य भविष्यति ॥
  • सूर्यास्त के वक्त जो धन याचकों को नहि दिया जाता, वह दूसरे दिन सुबह किसका होगा, यह मैं नहीं जानता !
  • अशनादीनि दानानि धर्मोपकरणानि च ।
  • साधुभ्यः साधुयोग्यानि देयानि विधिना बुधैः ॥
  • साधु पुरुषों को, साधुओं के योग्य अशन आदि धर्म के उपकरणों का दान बुधजनों ने विधिपूर्वक करना चाहिए ।
  • नाना दानं मया दत्तं रत्नानि विविधानि च ।
  • नो दत्तं मधुरं वाक्यं तेनाहं शूकरो मुखे ॥
  • मैं ने अनेक प्रकार के दान और विविध रत्न दिये, पर एक भी मधुर वाक्य नहि दिया, इस लिए मेरा मुख सूअर का है
  • अर्थिप्रश्नकृतौ लोके सुलभौ तौ गृहे ।
  • दाता चोत्तरदश्चैव दुर्लभौ पुरुषौ भुवि ॥
  • इस दुनिया में याचक और प्रश्नकर्ता घर-घर में सुलभ है, पर दाता और उत्तर देनेवाले अति दुर्लभ है
  • see also: भक्ति पर संस्कृत श्लोक हिन्दी में
  • ऐसे देशों में नहीं रहना चाहिए 
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