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Gyan shlok in hindi ज्ञान पर संस्कृत श्लोक part3
ज्ञान श्लोक

ज्ञान पर संस्कृत श्लोक part3

By SanskritShlok.com
18/09/2026 2 Min Read
2

Gyan shlok in hindi ज्ञान पर संस्कृत श्लोक part3

  • तेनाधीतं श्रुतं तेन सर्वमनुष्ठितम् ।
  • येनाशाः पृष्ठतः कृत्वा नैराश्यमवलंबितम् ॥
  • जिसने आशा को पीछे छोड दिया है और निष्कामता का अवलंबन किया है, वही सब पढा है, उसीने सब सुना है और उसीने सब का अनुष्ठान किया है (ऐसा समजो) ।
  • मातृवत्परदारेषु परद्रव्येषु लोष्ठवत् ।
  • आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति स पश्यति ॥
  • जो दूसरे की पत्नी को मातृवत् देखता है, दूसरे के द्रव्य को मिट्टी के पिंड भाँति देखता है, और भूत मात्र को आत्मवत् (अपने समान) देखता है, वही सच्चा देखता है ।
  • शमो दमस्तपः शौचं क्षान्तिरार्जवमेव च ।
  • ज्ञानं विज्ञानमास्तिक्यं ब्रह्मकर्म स्वभावजम् ॥
  • अन्तःकरण का निग्रह, इंद्रियों का दमन, तप, बाह्य-भीतर की शुद्धि, क्षमाभाव, ऋजुभाव, ज्ञान-विज्ञान में आस्था रखना और उन्हें प्रस्थापित करना – ये ब्राह्मण के स्वाभाविक कर्म है ।
  • अधर्मं धर्ममिति या मन्यते तमसावृता ।
  • सर्वार्थान्विपरीतांश्च बुद्धिः सा पार्थ तामसी ॥
  • हे पार्थ ! तमोगुण से व्याप्त बुद्धि अधर्म को भी यह धर्म है, ऐसा समज बैठती है; और वैसे हि दूसरी हर बात को भी विपरीत समजती है, वह बुद्धि तामसी है ।
  • यथा धर्ममधर्मं च कार्यं चाकार्यमेव च ।
  • अयथावत्प्रजानाति बुद्धिः सा पार्थ राजसी ॥
  • हे पार्थ ! इन्सान जिस बुद्धि से धर्म-अधर्म को, कर्तव्य-अकर्तव्य को यथार्थरुप से नहीं जान सकती, वह बुद्धि राजसी है ।
  • अभय पर संस्कृत श्लोक हिन्दी में
  • प्रवृत्तिं च निवृत्तिं च कार्याकार्ये भयाभये ।
  • बन्धं मोक्षं च या वेत्ति बुद्धिः सा पार्थ सात्त्विकी ॥
  • हे पार्थ ! जो बुद्धि प्रवृत्तिमार्ग और निवृत्तिमार्ग को, कर्तव्य-अकर्तव्य को, भय-अभय को, तथा बंधन-मोक्ष को यथार्थरुप से जानती है, वह बुद्धि सात्त्विकी है ।
  • आत्मानं रथिनं विद्धि शरीरं रथमेव तु ।
  • बुद्धिं तु सारथिं विद्धि मनः प्रग्रहमेव च ।
  • इन्द्रियाणी हृयानाहुर्विषयास्तेषु गोचरान् ।
  • आत्मा को रथ का स्वामी समज; शरीर को रथ समज; बुद्धि को सारथि समज; मन लगाम है, इन्द्रियाँ घोडे हैं, और विषय घोडे को चरने के मार्ग है ।
Gyan shlok in hindi ज्ञान पर संस्कृत श्लोक
  • See also गुरु पर संस्कृत श्लोक हिंदी में part2
  • दुष्ट पर संस्कृत श्लोक हिंदी में
  • असतो मा सत् गमय ।
  • तमसो मा ज्योतिर्गमय ।
  • मृत्योर्माऽमृतं गमय ।
  • मानवी जीवन का प्रवास असत् से सत् की ओर, अँधकार से प्रकाश की ओर, और मृत्यु से अमरत्व की ओर हो
  • ॐमे बंदुसंयुक्तं नित्यं ध्यायन्ति योगिनः ।
  • कामदं मोक्षदं चैव ॐकाराय नमो नमः ॥
  • समग्र विश्व ॐ में समा जाता है । इच्छा, सिद्धि और मोक्षप्राप्ति सभी जिसमें समाविष्ट है, योगी जिसका ध्यान करते हैं, उस ॐकार को नमस्कार ।
  • ओंकारः सर्वमंत्रणामुत्तमः परिकीर्तितः ।
  • ओंकारेण प्लवैनैव संसाराब्धिंतरिष्यसि ॥
  • सभी मंत्रो में ओंकार हि उत्तम मंत्र है । ओंकाररुप नौका से हि संसार सागर पार होगा ।

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