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Gyan shlok in hindi ज्ञान पर संस्कृत श्लोक
ज्ञान श्लोक

ज्ञान पर संस्कृत श्लोक

By SanskritShlok.com
18/09/2026 2 Min Read
3

Gyan shlok in hindi ज्ञान पर संस्कृत श्लोक

  • इहलोके सुखं हित्वा ये तपस्यन्ति दुर्धियः ।
  • हित्वा हस्तगतं ग्रासं ते लिहन्ति पदाङ्गुलिम् ॥
  • इहलोक के (पृथ्वी के) सुखों का त्याग करके जो मूढ लोग तप करते हैं, वे हाथ में आया हुआ निवाला छोडकर, मानो पैर की उँगलीयाँ चाटते हैं ! (नास्तिक मत)
  • यावज्जीवेत् सुखं जीवेदृणं कृत्वा धृतं पिबेत् ।
  • भस्मीभूतस्य देहस्य पुनरागमनं कुतः ॥
  • जितना जिओ, शौख से जिओ; ऋण (लोन) लेकर भी घी पीओ (भोग भुगतो) । भस्मीमभूत होने के बाद, यह देह वापस कहाँ आनेवाला है ? (नास्तिक मत)
  • आर्ता देवान् नमस्यन्ति तपः कुर्वन्ति रोगिणः ।
  • अधना दातुमिच्छन्ति वृद्धा नार्यः पतिव्रताः ॥
  • दुःखी लोग भगवान को नमस्कार करते हैं (करना पडता है); रोगी तप करते हैं (करना पडता है); धनहीन लोग देने की ईच्छा रखते हैं (क्यों कि ईच्छा रखने में क्या जाता है ?); और वृद्ध स्त्री पतिव्रता होती है (क्यों कि उन्हें परपुरुष आश्रय नहीं देता) !
  • यदा किंचिज्ज्ञोऽहं द्विप इव मदान्धः समभवं
  • तदा सर्वज्ञोऽस्मित्य-भवदवलिप्तं मम मनः ।
  • यदा किंचित् बुधजनसकाशादवगतम्
  • तदा मूर्खोऽस्मीति ज्वर इव मदो मे व्यपगतः ॥
  • जब मैं बहुत कम जानता था, तब मैं हाथी की तरह मदमस्त हो गया था; मैं सर्वज्ञ हूँ ऐसा मेरे मन को गर्व हो गया था । पर जब शयाने लोगों के पास से थोडा कुछ जानने लगा, तब ‘मैं मूर्ख हूँ’ ऐसा ध्यान में आते ही बुखार जैसा मेरा मद चला गया ।
  • भोगा न भुक्ता वयमेव भुक्ताः
  • तपो न तप्तं वयमेव तप्ताः ।
  • कालो न यातो वयमेव याताः
  • तृष्णा न जीर्णा वयमेव जीर्णाः ॥
  • हमने भोग नहीं भुगते, बल्कि भोगने ही हमें भुगता है; हमने तप नहीं किया, बल्कि हम स्वयं ही तप्त हो गये हैं; काल पसार नहीं हुआ, हम ही पसार हुए हैं; तृष्णा जीर्ण नहीं हुई, पर हम ही जीर्ण हुए हैं !
Gyan shlok in hindi ज्ञान पर संस्कृत श्लोक:
  • आदित्यस्य गतागतैरहरहःसंक्षीयते जीवितम्
  • व्यापारैर्बहुकार्यभार-गुरूभिः कालो न विज्ञायते ।
  • दृष्ट्वाजन्मजराविपत्तिं मरणं त्रासश्च नोत्पद्यते
  • पीत्वा मोहमयीं प्रमादमदिरा मुन्मत्तभूतं जगत् ॥
  • सूर्य् के अवागमन से दिनबदिन इन्सान की जिंदगी कम होती जाती है । व्यापार/व्यवसाय के काम में व्यस्त समय कब निकल जाता है, उसका ध्यान नहीं रहेता । जन्म, जरा (बुढापा), विपत्ति और (साक्षात्) मृत्यु देखकर भी हमें डर नहीं लगता ! मोहमय प्रमादरुप दारु पीकर सारा जगत उन्मत्त बना है !
  • अशनं मे वसनं मे जाया मे बन्धुवर्गो मे ।
  • इति मे कुर्वाणं काल वृको हन्ति पुरुषाजम् ॥
  • अन्न मेरा, वस्त्र मेरा, स्त्री मेरी, सगे-संबंधी मेरे… ऐसे ‘मेरा, मेरा’ (मे, मे..) करनेवाले पुरुषरुपी बकरे को, कालरुपी सूअर मार डालता है ।
  • ज्ञान पर संस्कृत श्लोक Gyan shlok in hindi next part
  • गुरु श्लोक Top sanskrit shlok on guru in hindi
  • What is hatha yoga? hatha yoga definition
  • विद्वानेव विजानाति विद्वज्जनपरिश्रमम् ।
  • नहीं बन्ध्या विजानाति गुर्वीं प्रसववेदनाम् ॥
  • विद्वानों को कितना परिश्रम होता है, वह केवल विद्वान ही समज सकता है । प्रसूति की पीडा क्या होती है, वह वंद्या नहीं जानती !
  • नित्यमाचरतः शौचं कुर्वतः पितृतर्पणम् ।
  • यस्य नोद्विजते चेतः शास्त्रं तस्य करोति किम् ॥
  • सदैव शौच विधि का आचरण और पितृतर्पण करने के बावजुद, जिसे वैराग्य खडा नहीं होता, शास्त्र उनका क्या करेगा ?
  • प्रातर्मूत्र पुरीषाभ्यां मध्याह्ने क्षुत्पिपासया ।
  • तृप्ताः कामेन बध्यन्ते प्राणिनो निशि निद्रया ॥
  • प्राणीयों को सवेरे मल-मूत्र, मध्याह्न में क्षुधा-तृषा और रात को निंद्रा बाधा करते हैं; तृप्त (जिसके पास सब कुछ है) मनुष्य को काम (विषयानुराग) बाधा करता है ।

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