दीप जलाना संस्कृति है बुझाना नहीं: दीप ज्योति परम ज्योति

दीप ज्योति परम ज्योति

दीप जलाना हमारी संस्कृति है बुझाना हमारी संस्कृति नहीं हो सकती
दीप जलाना भारत की अत्यंत प्राचीन व अनादि वैदिक परंपरा है , यह अत्यंत विशेष भी है ,लेकिन आज जो जन्मदिन पर केक काटने के साथ जो बत्ती बुझा दी जाती है वो महा विरुद्ध है , गलत है , ये भारतीय संस्कृति की अज्ञान की परिकाष्ठा है का जो प्रचलन है उसमे मोमबत्ती बुझाना संस्कृति के विरुद्ध तो है वेदों के विरुद्ध है क्यूंकि दीप जलाना हमारी संस्कृति है बुझाना हमारी संस्कृति नहीं हो सकती , जन्मदिन पर दीप जलाएं बुझाएं नहीं , यह हमारी संस्कृति का बहुत ही महत्वपूर्ण अंग है

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टेक्नोलॉजी के कोई विरुद्ध नहीं है आधुनिक टेक्नोलॉजी में पश्चिम देश वाले भारत से आगे है कोई संशय नहीं किन्तु अध्यात्म के विज्ञानं व् जीवन दर्शन में भारत ने उचाईयों को छुआ है वो अद्वितीय है ,इस्सलिये हर चीज पश्चिम से नक़ल नहीं की जा सकती ,दर्शन की नक़ल विश्व को हम भारतियों से करनी होगी।

हमारी संस्कृति में जन्मदिन मनाने की व्यवस्था कई और पर्याप्त है पर फिर भी अगर केक आदि किसी को काटना ही काटना है तो उस समय मोमबत्ती या दीप बुझाना मत आज के बाद ,हमेशा मोमबत्ती या दीप को जलाएं।।

और दीप की महिमा यहां कुछ शब्दों में नहीं समेट पाएंगे फिर कभी विस्तार से व्याख्या ले के आऊंगा
संक्षेप में इतना ही कहूंगा :

दीप ज्योति परम ज्योति दीप ज्योति जनार्दन:
दीपो हरतु मे पापं दीप ज्योति नमोस्तुते!

दीप दर्शन मंत्र Deep shlok from vedas

शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा ।

शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपकाय नमोऽस्तु ते ॥

दीपो ज्योति परं ब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दन: ।

दीपो हरतु मे पापं संध्यादीप नमोऽस्तु ते ॥

जो शुभ करता है, कल्याण करता है, आरोग्य रखता है, धन संपदा देता है और शत्रु बुद्धि का विनाश करता है, ऐसे दीप की रोशनी को मैं नमन करता हूँ॥

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